A magic solution to end the problem once and for all.
एक बार में समस्या हमेशा के लिए खत्म करने का जादू
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हम सभी का जीवन कुछ छोटी और कुछ बड़ी समस्याओं से बना है, कुछ पल ख़ुशी के भी आते है। अगर देखे कुछ समस्याएं इतनी बड़ी होती है की रात भर करवटे बदलने मे निकल जाती है। क्या कभी अपने इस बात पर गौर की है कि सभी समस्याएं एक ही चक्र मे घूमती रहती हैं? हम उनसे लड़ते है, थक जाते है, थोड़ा आराम करते है और फिर से वही लड़ाई शुरू करते है। इन सब चीज़ो से एक सवाल उठता है कि क्या समस्या बाहर है, या हमारे ही देखने मे कमी है?
आज के ब्लॉग मे हम यही सब सीखने की कोशिश करेंगे कि समस्या क्या है? उसमें सुधर कैसे किया जाये? और उसको देखने का नजरिया कैसे बदला जाये?
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कहानी एक साधु की
एक समय की बात है एक गांव मे बहुत भयंकर सूखा पड़ गया। जिस भी जगह से पानी मिल सकता था सब सुख चुके थे। सभी गांव वाले पानी के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहे थे। गांव मे एक बुजुर्ग साधु था वह बोला कि "पहाड़ी के ऊपर एक जादुई कुआं है। उसका पानी पीने से सारी प्यास हमेशा के लिए मिट जाती है। साथ ही साधु ने एक शर्त भी बताई की वहां सिर्फ वही जा सकता है जो अपनी प्यास को पहचान सकता है।
गांव के कई लोग कुंए के पास गए, पर सभी खाली हाथ लौट आये। और वापिस आकर बताया कि "कुआ सूखा हुआ है, और उसमें एक बड़ा सा पत्थर पड़ा है।" अंत मे एक लड़के ने सोचा मैं जा कर देखता हूँ। उसने भी जाकर देखा लोग सही कह रहे थे की वहां एक बड़ा पत्थर पड़ा है। वह वही बैठकर सोचने लगा कि "साधु ने ऐसा क्यों बोला? क्या ऐसा कुछ है जो मैं नहीं देख पा रहा?" फिर उसने गौर किया। पत्थर पर कुछ लिखा था "जो समस्या दिखती है, वह दरवाजा है। जो नहीं दिखती, वह चाबी।"
युवक ने पत्थर को धक्का मारने कि बहुत कोशिश की, पर वह उसे हिला भी नहीं पाया। हारकर वह पत्थर के चारों और घूमता रहा। तभी उसने देखा पत्थर के एक कोने मे छोटा सा फावड़ा गड़ा हुआ है। उसने फावड़ा निकाला और पत्थर के बिल्कुल नीचे, जमीन में खोदना शुरू किया। खोदते समय उसको एक छोटी सी चाबी मिली। वह यह देखकर हैरान हो गया वह चाबी पत्थर मे छुपे ताले मे फिट हो गई। जैसे ही ताला खुला वह पत्थर खुद हट गया और कुंए से पानी का झरना फूट पड़ा।
इस कहानी से क्या सीखने को मिलता है? गांव के लोगो ने समस्या को सतही तौर पर देखा की पत्थर बहुत भारी और वह हिल नहीं सकता। पर युवक ने समस्या को समझा। उसने देखा की समस्या (पत्थर) तो एक तरह का इशारा है, एक दरवाजा है, जो असली हल (चाबी) की तरफ इशारा कर रहा है।
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समस्या को कैसे समझें? तीन स्टेप में पहचानिए
समस्या को समझना, उसे सुलझाने से ज्यादा जरूरी है। जब तक समझ नहीं आएंगे उसका समाधान भी नहीं हो सकता। एक डॉक्टर इसी वजह से किसी के इलाज से पहले बीमारी को समझता है, फिर इलाज शुरू करता है। अगर बिना समझे इलाज शुरू कर दिया तो कोई नयी समस्या पैदा हो सकती है। इसको हम तीन हिस्सों मे समझने की कोशिश करते है:
भावना को अलग करें, तथ्य को पकड़ें:
हम अक्सर समस्या को उससे जुडी भावनाओ (तनाव, डर, गुस्सा) के रूप मे देखने लगते है। पहला कदम यह है की एक कागज ले, और दो कॉलम बना ले
एक तरफ लिखे की क्या महसूस कर रहा हूँ? (जैसे: मुझे लग रहा है मैं कभी आगे नहीं बढ़ पाउँगा, मैं अयोग्य हूँ।") दूसरी तरफ लिखे की तथ्य क्या है? (जैसे: पिछले कामों मे मैंने ऐसी कौनसी गलितयां की जिस वजह से यह हो रहा है, और उनमे सुधार कैसे कर सकता हूँ)
अगर देखे तो समस्या तथ्यों मे होती है, भावनाओं में नहीं। भावना बताती है कि समस्या है, पर हल तथ्यों में छिपा है।
'क्यों' का पेड़ उगाएं:
पेड़ उगना धरती के लिए भी अच्छा है और खुद के लिए भी। पर 'क्यों' का पेड़ थोड़ा अलग तरह का है, यह तरीका किसी एक बड़ी कार कंपनी मे इस्तेमाल किया जाता है। जहां पर समस्या को पहचान कर उसपर सवाल किए जाते है
समस्या: प्रोजेक्ट हमेशा देरी से पूरा होता है।
क्यों? क्योंकि अंतिम समय पर कोई बदलाव आते है।
क्यों? क्योंकि ग्राहक की जरूरते शुरुआत में क्लियर नहीं होतीं।
क्यों? क्योंकि पहली ही मीटिंग मे हम स्कोप डॉक्यूमेंट नहीं बनाते।
क्यों? क्योंकि हमें लगता है क्लाइंट को जल्दी काम चाहिए, दस्तावेज बनाने में समय लगेगा।
क्यों? क्योंकि हमने कभी कोशिश करके नहीं देखा कि एक अच्छा स्कोप डॉक्यूमेंट वास्तव में समय बचाता है।
जड़ मिल गई: एक गलत धारणा ("दस्तावेज बनाना समय की बर्बादी है")।
समस्या या लक्षण?
सिरदर्द के लिए गोली खाना, और डॉक्टर के पास जाकर माइग्रेन का इलाज कराना, दोनों में फर्क होता है। यह खुद से समझना पड़ेगा कि "क्या यह खुद एक समस्या है, या किसी बड़ी समस्या का लक्षण है?" कभी-कभी रिश्तों मे लगातार झगड़े समस्या नहीं, यह आपस मे बातचीत की कमी का लक्षण है। पैसो की कमी समस्या नहीं, बल्कि पैसो को सही तरीके से ना इस्तेमाल करने का लक्षण है।
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एक बार में कैसे खत्म करें? 'वन-स्ट्राइक फिनिश' का विज्ञान
समस्या को समझना आधी जीत है, बाकि आधी उसे सही तरीके से खत्म करने से होती है की वह कभी वापिस लौटकर ना आये। यह कोई जादू नहीं, तरीका है। इसको कुछ स्टेप्स मे समझने की कोशिश करते है
स्टेप 1: जड़ की पहचान, फिर उसपर 'न्यूक्लियर ऑप्शन'
समस्या की जड़ को पहचान लेने के बाद, खुद से पूछे, "वह एक ऐसा कौनसा काम है, जो इस जड़ को ही एक ही बार मे खत्म कर देगा?" यह काम छोटा भी हो सकता है, पर उसका असर बहुत बड़ा हो सकता है।
अगर हम एक समस्या को देखे की हमेशा काम के बोझ तले दबे रहना। जिसकी जड़ कुछ भी हो सकती है जैसे हर किसी को "हाँ" कह देना, 'ना' कहने का डर। अगर इसको एक ही बार मे खत्म करना है तो अगले सात दिनों के लिए, बिना किसी को वजह बताये, बिना माफ़ी मांगे, हर नए काम को मना करने का अभ्यास करे। यह एक काम आपके अंदर के डर को दूर कर देगा, जिसने आपको गुलाम बना रखा है।
स्टेप 2: बैकअप प्लान को खुद मार दो (बर्न द ब्रिजेज)
हम अक्सर समस्या का समाधान खोजते समय एक रास्ता छोड़ देते है, "अगर यह तरीका नहीं काम किया, तो पुराने तरीके से ही काम करूँगा।" यही हमारी असफलता का एक कारण बनता है। जब एक बार फैसला हो जाए की इसको एक बार मे कैसे खत्म करे, उसके बाद सारे वैकल्पिक रास्तों को मानसिक रूप से बंद कर दें। नावों को जला दें। जब पीछे हटने का रास्ता नहीं होता, तो आपके पास सिर्फ एक ही दिशा बचती है और वो है सफलता की।
स्टेप 3: सिस्टम बनाओ, न कि सिर्फ हल
एक बार की कार्रवाई से समस्या खत्म हो सकती है, पर उसके वापस आने से रोकने के लिए एक छोटा सिस्टम बनाना बहुत जरूरी है। इसको ऐसे समझने की कोशिश करते है की समस्या है, सेहत खराब। इसको एक एक बार मे खत्म करने के लिए जो सिस्टम है, अगले 21 दिन लगातार सुबह 20 मिनट वॉक करने की शपथ लेना (छोटा, लेकिन निर्णायक कदम)। उसके लिए करने के जूते रात से बिस्तर के पास रखना। एक चार्ट बनाना और हर दिन टिक लगाना। 21 दिन बाद, इसे 'जीवन का डिफॉल्ट सेटिंग' बना देना।
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अपने जीवन में "एक बार मे खत्म करने का तरीका" कैसे लाए?
- सबसे बड़ी चिंता चुनें: अपनी समस्याओं की एक लिस्ट बना ले और जो उस लिस्ट मे सबसे ऊपर हो जो सबसे ज्यादा ऊर्जा चूसती है।
- जड़ का नामकरण करें: ऊपर जो तरीका बतया है, उससे असली जड़ (गलत धारणा, डर, आदत) का नाम कागज पर लिख लें।
- जड़ से खत्म करने का प्लान बनाए: एक ऐसा प्लान बनाए जो सहायता कर सके
- निर्णायक हो: इसके बाद कोई आधा-अधूरा कदम नहीं, जो निर्णय लिया उसपे टिके रहना।
- प्रतीकात्मक: ऐसा काम करना जो याद दिलाता रहे।
- वापसी ना हो सके: जब हमे पता हो वापिस आ सकते है, हम उस काम मे दिल नहीं लगाते, पर जब सारे रस्ते बंद हो जाए तो कुछ करना ही पड़ता है।
एक तिथि तय करें और उसे 'शपथ दिवस' बना दें: इस एक काम को करने के लिए एक दिन ऐसा चुन ले, और उस दिन को शपथ दिवस का नाम दे। जैसे "आज मेरा लोगो को ना कहने का दिन है" या "आज मेरा फ़ोन ना इस्तेमाल करने का दिन है।" इस तरह के कई दिन बना सकते हो जो हमेशा याद दिलाते रहेंगे की तुम ज़िंदा हो और जीवन मे कुछ बड़ा करने कोशिश कर रहे हो।
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निष्कर्ष
समस्याएं जीवन का एक अटूट हिस्सा है, पर उनका चक्र टूटना जरूरी है। उन्हें समझने का अर्थ है अपनी भावनाओ से निकलकर तथ्य को समझना, और लक्षण को छोड़कर जड़ को पकड़ना है। उन्हें एक बार मे खत्म करने का तरीका है एक फैसला लेना और उस पर टिके रहना। जो समस्या के साथ-साथ उसके दोबारा पैदा होने की संभावना को भी खत्म कर दे।
उस युवक की तरह, आप भी पत्थर को हटाने मे अपनी ताकत ना लगाए। उस पत्थर के चारो तरफ घूमते रहिए। उस चाबी को ढूंढ़ने की कोशिश करिये वो एक फैसला, एक हमला और एक वचन। फिर, देखिए कैसे आपकी सबसे पुरानी समस्या का भी समाधान होता है। जो सिर्फ आपकी नहीं आपकी आने वाली पीढ़ियों की भी प्यास बुझा सकता है।
आज से शुरुआत करे। एक समस्या चुने, एक वर तैयार करे और हमेशा के लिए उसको खत्म कर दे।
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